Sunday, June 25, 2017
Wednesday, April 26, 2017
किचन गार्डनिंग
By Colors of rajasthan 3:16 AM
flowering, Gardening, Home Vegetables, Kitchen gardening, own garden, own vegetables No comments
मल्टीप्लायर कि मदत से किचन गार्डनिंग को आसान बनाइये.
अब सब्जियां घर पर उगाइए, हर महीना हजारों रुपये बचाइए.
अभी तक १०० में ६५ व्यक्ति आपके ग्राहक थे, अब आज मिली नई जानकारी के अनुसार जो भी व्यक्ति आपको मिलेगा वह आपका ग्राहक है |
रासायनिक खादों से ज्यादा नुकसान जहरीली दवाओं से होता है, सब्जियों पर दवाओं का छिड़काव होते ही, सब्जियां बाजार में बिकने के लिए आ जाती है, इस तरह सब्जियों पर छिड़की गई जहरीली दवाएं हमारे आरोग्य को ख़राब कर रही है.
शहर में रहनेवाले बहोत से लोगों घर के पास कुछ जगह होती है, उसमें वो तरह-तरह के पौधे लगाते है, कुछ लोग बड़े पेड़ लगते है, ये सभी लोग अपनी आवश्यकता की सब्जियां घर पर उगा सकते है, लोगों में जहरीली दवाओं की जागरूकता है, सिर्फ आवश्यकता है, उनको बताने की, कि आप आसानी से आपके घर में सब्जी ऊगा सकते है.
मल्टीप्लायर का छोटा २० रुपये कीमत का पाउच, किसी भी किचन गार्डन से, पुरे परिवार के लिए लगनेवाली सब्जी की आवश्यकता पूरी करने में सक्षम है, बस आठ दिन में एक बार १५ लीटर पानी में घोलकर डालना है.
कोन कोनसी सब्जियां लगाईं जाएँ इस बाबत आप सलाह भी दे सकते है, कुछ पौधों पर आनेवाली सब्जी, तथा कुछ बेल पर लगनेवाली सब्जी लगाकर महीने में सिर्फ ८० रुपये खर्च करके, पुरे महीने फ्री सब्जी प्राप्त कि जा सकती है.
कुछ लोगों के पास घर की छत पर ज्यादा जगह होती है, वहां भी सब्जियां लगाई जा सकती है, सब्जियों की देखरेख के लिए छत पर जानेआने से व्यायाम भी होगा, जिसके कारण शरीर तन्दुरुस्त रहेगा.
छत पर सब्जियां लगाने के लिए, कलर के डब्बे या कोई भी प्लास्टिक का डब्बा भंगार से खरीदकर उसमें मिटटी भरकर पौधे या बेल लगा सकते है, आप यह भी बताइए कि आप घर पर सब्जियां लगाकर महीने के कम से कम २००० रुपये बचा सकते है.
आप स्कूल, कॉलेज, सरकारी तथा निम सरकारी कार्यालय, दुकानदार सभी को आसानी से सब्जियां उगाने का तरीका सिखाकर मल्टीप्लायर का पाउच बेच सकते है.
लोगों को बाद में सिखाइए पहले आप स्वयं अपने घर पर सब्जियां लगाना प्रारम्भ करें, आपको देखकर कम से कम ५० लोग अपने-अपने घर सब्जियां लगाने लगेंगे, इस तरह कुछ ही दिनों में सारा शहर अपने घर में सब्जियां उगाने लगेगा.
जब ज्यादा से ज्यादा लोग सब्जी उगाने लगेंगे तब उनको मल्टीप्लायर कि आवश्यकता पड़ेगी, इसलिए आपके घर से सुरुवात करिये, लोग आपका किचन गार्डन देखेंगे और मल्टीप्लायर का पाउच लेकर जायेंगे.
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें :
Jai Prakash Sharma
Business Co-Ordinator
08233888830
Krishna AgriBusiness Development Pvt. Ltd.
अब सब्जियां घर पर उगाइए, हर महीना हजारों रुपये बचाइए.
अभी तक १०० में ६५ व्यक्ति आपके ग्राहक थे, अब आज मिली नई जानकारी के अनुसार जो भी व्यक्ति आपको मिलेगा वह आपका ग्राहक है |
रासायनिक खादों से ज्यादा नुकसान जहरीली दवाओं से होता है, सब्जियों पर दवाओं का छिड़काव होते ही, सब्जियां बाजार में बिकने के लिए आ जाती है, इस तरह सब्जियों पर छिड़की गई जहरीली दवाएं हमारे आरोग्य को ख़राब कर रही है.
शहर में रहनेवाले बहोत से लोगों घर के पास कुछ जगह होती है, उसमें वो तरह-तरह के पौधे लगाते है, कुछ लोग बड़े पेड़ लगते है, ये सभी लोग अपनी आवश्यकता की सब्जियां घर पर उगा सकते है, लोगों में जहरीली दवाओं की जागरूकता है, सिर्फ आवश्यकता है, उनको बताने की, कि आप आसानी से आपके घर में सब्जी ऊगा सकते है.
मल्टीप्लायर का छोटा २० रुपये कीमत का पाउच, किसी भी किचन गार्डन से, पुरे परिवार के लिए लगनेवाली सब्जी की आवश्यकता पूरी करने में सक्षम है, बस आठ दिन में एक बार १५ लीटर पानी में घोलकर डालना है.
कोन कोनसी सब्जियां लगाईं जाएँ इस बाबत आप सलाह भी दे सकते है, कुछ पौधों पर आनेवाली सब्जी, तथा कुछ बेल पर लगनेवाली सब्जी लगाकर महीने में सिर्फ ८० रुपये खर्च करके, पुरे महीने फ्री सब्जी प्राप्त कि जा सकती है.
कुछ लोगों के पास घर की छत पर ज्यादा जगह होती है, वहां भी सब्जियां लगाई जा सकती है, सब्जियों की देखरेख के लिए छत पर जानेआने से व्यायाम भी होगा, जिसके कारण शरीर तन्दुरुस्त रहेगा.
छत पर सब्जियां लगाने के लिए, कलर के डब्बे या कोई भी प्लास्टिक का डब्बा भंगार से खरीदकर उसमें मिटटी भरकर पौधे या बेल लगा सकते है, आप यह भी बताइए कि आप घर पर सब्जियां लगाकर महीने के कम से कम २००० रुपये बचा सकते है.
आप स्कूल, कॉलेज, सरकारी तथा निम सरकारी कार्यालय, दुकानदार सभी को आसानी से सब्जियां उगाने का तरीका सिखाकर मल्टीप्लायर का पाउच बेच सकते है.
लोगों को बाद में सिखाइए पहले आप स्वयं अपने घर पर सब्जियां लगाना प्रारम्भ करें, आपको देखकर कम से कम ५० लोग अपने-अपने घर सब्जियां लगाने लगेंगे, इस तरह कुछ ही दिनों में सारा शहर अपने घर में सब्जियां उगाने लगेगा.
जब ज्यादा से ज्यादा लोग सब्जी उगाने लगेंगे तब उनको मल्टीप्लायर कि आवश्यकता पड़ेगी, इसलिए आपके घर से सुरुवात करिये, लोग आपका किचन गार्डन देखेंगे और मल्टीप्लायर का पाउच लेकर जायेंगे.
Jai Prakash Sharma
Business Co-Ordinator
08233888830
Krishna AgriBusiness Development Pvt. Ltd.
Tuesday, April 25, 2017
कम खर्च में अधिक उत्पादन
By Colors of rajasthan 1:53 AM
farming, Kisaanhelp, Organic, Organicagriculture, organicfarming, organicvegetables, plantation No comments
मूंगफली, भुईमूग.
ऐसी ग्रोथ पूरा खेत भर गया.
ऐसी ग्रोथ पूरा खेत भर गया.
१) किसान भाई का नाम सुनील इंदल परदेशी ग्राम तांदली तहसील अमलनेर जिला जळगाव, इनको कंपनी के डीलर प्रभुसिंग परदेशी सर ने मल्टीप्लायर के साथ कम खर्च में अधिक उत्पादन कैसे लिया जाय इसका मार्गदर्शन किया.
२) किसान भाई ने मूंगफली लगते समय यूरिया तथा पोटास के साथ १ किलो मल्टीप्लायर दिया.
३) मल्टीप्लायर रासायनिक खादों के दुष्परिणाम कम करता है, तथा खाद फसल को ज्यादा समय तक उपलब्ध होती रहे इसमें भी मदत करता है.
४) मूंगफली की पत्तियां हलके पीले रंग की होती हैं, किसी किसान भाई ने बहोत ज्यादा खर्च किया तभी पत्तियां हरी बनती हैं, यहाँ मल्टीप्लायर के इस्तेमाल से पत्तियां हरी भी बन गई, और ग्रोथ अच्छी होने के
कारण खेत भरा हुआ दिख रहा है.
कृष्णा अग्रीबिजनेस डेवलपमेंट प्रायवेट लिमिटेड
बिजनेस कोऑर्डिनेटर
जय प्रकाश शर्मा
8233888830
Friday, April 7, 2017
रसायन मुक्त कृषि के तीन सरल सूत्र
By Colors of rajasthan 12:39 AM
farming, Kisaanhelp, Organic, Organicagriculture, organicfarming, Organicflowers, organicvegetables, plantation, vegetables No comments
स्वदेशी, स्वावलंबी एवं रसायन मुक्त कृषि के तीन सरल सूत्र
(1) गोबर एवं गोमूत्र से बनाया गया अद्भुत खाद 1 एकड़ जमीन के लिए
बनाने की विधि
1. 15 किलो गोबर, 15 लीटर गोमूत्र, 1 किलो गुड(सडा हुआ), 1 किलो दाल का आटा( मुग मुसुर राहेड चना किसी भी दाल का चुरा), पुराने पेड़ की मिटटी 1 किलो क्रम से एक साथ किसी बड़े जगह में मिलायें
2. 15 दिन तक प्रतिदिन सुबह शाम डंडे से बने घोल को हिलायें
3. 16 वे दिन से प्राप्त घोल का प्रयोग खाद के रूप में किया जा सकता है
4. खेतों में इसका प्रयोग 21 दिन में एक बार पूरा करना आवश्यक है
यह अत्यंत शक्तिशाली उपयोगी खाद है जिसके प्रयोग से खेतों में उत्पादन अच्छा होता है और खेत की मिटटी हमेसा अच्छी और उपजाऊ बनी रहती है भूमि को सभी आवश्यक तत्त्व गोबर गोमूत्र से बने खाद से स्वयं ही प्राप्त हो जाता है, कीट एवं हानिकारक जंतु उत्पन्न नहीं होते, रासायनिक खादों के प्रयोग से कीट एवं जंतु अधिकांश मात्र में उत्पन्न होते हैं जो फसलों को नस्ट करते हैं
(2) जैविक कीटनाशक का निर्माण
बनाने की विधि
20 लीटर गोमूत्र , 3किलो नीम का पत्ता या निम्बोली, 3किलो धतुरा का पत्ता, 3किलो आकन्त का पत्ता, 3किलो बेल्पत्ता, 3 किलो सरीफा का पत्ता(सीताफल), 3 किलो आडू का पत्ता
1. 20 लीटर गोमूत्र में सभी पत्तियों की चटनी बनाकर डाल दें
2. मूत्र को उबालना है, उबलते समय 500 -750gm तम्बाकू का पाउडर डाल दें
3. थोड़ी देर उबलने के बाद प्राप्त घोल को ठंडा कर लें और पात्रों में भर कर रख लें
प्राप्त घोल अत्यंत प्रभावकारी कीटनाशक है यह खेत में उत्पन्न होने वाले सभी हानिकारक कीटों एवं जन्तुओं को मारने में सक्षम है
प्रयोग खेतों में प्रयोग से पूर्व 1 लीटर कीटनाशक में 20 लीटर जल मिला लें उसके बाद ही प्रयोग करें
2-3 दिनों में ही100% सभी हानिकारक कीट एवं जन्तुओं की मृत्यु हो जाती हैं फसल पर दुबारा कीट लगने की संभावनायें समाप्त हो जाती है
(3) बीज संस्कार 1kg बीज के लिए
1. 1kg गोबर एवं गोमूत्र मिलायें
2. 100 ग्राम कलई चुना 2-3 लीटर पानी में तैयार करें (शाम को पानी में डाल देने पर सुबह तक चुना तैयार हो जाता है)
3.प्राप्त चुना जल को गोबर एवं गोमूत्र में मिलायें
1kg गोबर+ 1kg गोमूत्र+ प्राप्त चुना जल
4. बीजों को अब इस घोल में डाल दें 6 -7 घंटे बाद निकालकर छांव में सुखा दीजिये
प्रयोग के बाद जो बीज हमें प्राप्त हुए हैं इनका प्रयोग करने से प्रमुख लाभ 1. फसल उत्पादन अच्छा और अधिक होता है
2. कीट लगने की संभावनायें कम रहती हैं
3. भूमि उपजाऊ बनी रहती है
प्रयोगों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश 1. गाय बैल या भेंस के मल एवं मुत्रों का उपयोग तीनो विधियों में किया जा सकता है किन्तु गाय के मल एवं मुत्रों का प्रयोग सर्वोत्तम होता है
2.प्रत्येक विधि 1 एकड़ जमीन और 1kg बीज के लिए बताई गयी है आवश्यकता अनुसार सामग्रियां दुगनी कर लीजिये
रसायन मुक्त जैविक एवं स्वदेशी कृषि के लाभ
1. प्रकृति एवं पर्यावरण से संतुलन बनाकर अच्छा और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है
2. उत्पन्न खाद्यान्न में उचित मात्र में सभी पोषकतत्व उपलब्ध होते हैं स्वस्थ भोजन प्राप्त होता है
3.विषयुक्त भोजन एवं उनसे होने वाले असाध्य बीमारियों एवं रोगों से मुक्ति मिलती है
4. शरीर की प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है हम स्वस्थ और रोगों से मुक्त रहते हैं
5. कम खर्चे में अधिक लाभ कमाया जा सकता है स्वदेशी कृषि ही एक ऐसा स्वावलंबी कार्य है जिसमे 900% लाभ कमाया जा सकता है यदि हम 10 रूपये खर्च करते हैं तो 100 रूपये कमा सकते हैं
6. हमारे पशुधन का संवर्धन होता है
7.रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों में होने वाला खर्चा बच सकता है
8. स्वस्थ सुखी समृद्ध एवं स्वावलंबी भारत का निर्माण संभव है
(1) गोबर एवं गोमूत्र से बनाया गया अद्भुत खाद 1 एकड़ जमीन के लिए
बनाने की विधि
1. 15 किलो गोबर, 15 लीटर गोमूत्र, 1 किलो गुड(सडा हुआ), 1 किलो दाल का आटा( मुग मुसुर राहेड चना किसी भी दाल का चुरा), पुराने पेड़ की मिटटी 1 किलो क्रम से एक साथ किसी बड़े जगह में मिलायें
2. 15 दिन तक प्रतिदिन सुबह शाम डंडे से बने घोल को हिलायें
3. 16 वे दिन से प्राप्त घोल का प्रयोग खाद के रूप में किया जा सकता है
4. खेतों में इसका प्रयोग 21 दिन में एक बार पूरा करना आवश्यक है
यह अत्यंत शक्तिशाली उपयोगी खाद है जिसके प्रयोग से खेतों में उत्पादन अच्छा होता है और खेत की मिटटी हमेसा अच्छी और उपजाऊ बनी रहती है भूमि को सभी आवश्यक तत्त्व गोबर गोमूत्र से बने खाद से स्वयं ही प्राप्त हो जाता है, कीट एवं हानिकारक जंतु उत्पन्न नहीं होते, रासायनिक खादों के प्रयोग से कीट एवं जंतु अधिकांश मात्र में उत्पन्न होते हैं जो फसलों को नस्ट करते हैं
(2) जैविक कीटनाशक का निर्माण
बनाने की विधि
20 लीटर गोमूत्र , 3किलो नीम का पत्ता या निम्बोली, 3किलो धतुरा का पत्ता, 3किलो आकन्त का पत्ता, 3किलो बेल्पत्ता, 3 किलो सरीफा का पत्ता(सीताफल), 3 किलो आडू का पत्ता
1. 20 लीटर गोमूत्र में सभी पत्तियों की चटनी बनाकर डाल दें
2. मूत्र को उबालना है, उबलते समय 500 -750gm तम्बाकू का पाउडर डाल दें
3. थोड़ी देर उबलने के बाद प्राप्त घोल को ठंडा कर लें और पात्रों में भर कर रख लें
प्राप्त घोल अत्यंत प्रभावकारी कीटनाशक है यह खेत में उत्पन्न होने वाले सभी हानिकारक कीटों एवं जन्तुओं को मारने में सक्षम है
प्रयोग खेतों में प्रयोग से पूर्व 1 लीटर कीटनाशक में 20 लीटर जल मिला लें उसके बाद ही प्रयोग करें
2-3 दिनों में ही100% सभी हानिकारक कीट एवं जन्तुओं की मृत्यु हो जाती हैं फसल पर दुबारा कीट लगने की संभावनायें समाप्त हो जाती है
(3) बीज संस्कार 1kg बीज के लिए
1. 1kg गोबर एवं गोमूत्र मिलायें
2. 100 ग्राम कलई चुना 2-3 लीटर पानी में तैयार करें (शाम को पानी में डाल देने पर सुबह तक चुना तैयार हो जाता है)
3.प्राप्त चुना जल को गोबर एवं गोमूत्र में मिलायें
1kg गोबर+ 1kg गोमूत्र+ प्राप्त चुना जल
4. बीजों को अब इस घोल में डाल दें 6 -7 घंटे बाद निकालकर छांव में सुखा दीजिये
प्रयोग के बाद जो बीज हमें प्राप्त हुए हैं इनका प्रयोग करने से प्रमुख लाभ 1. फसल उत्पादन अच्छा और अधिक होता है
2. कीट लगने की संभावनायें कम रहती हैं
3. भूमि उपजाऊ बनी रहती है
प्रयोगों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश 1. गाय बैल या भेंस के मल एवं मुत्रों का उपयोग तीनो विधियों में किया जा सकता है किन्तु गाय के मल एवं मुत्रों का प्रयोग सर्वोत्तम होता है
2.प्रत्येक विधि 1 एकड़ जमीन और 1kg बीज के लिए बताई गयी है आवश्यकता अनुसार सामग्रियां दुगनी कर लीजिये
रसायन मुक्त जैविक एवं स्वदेशी कृषि के लाभ
1. प्रकृति एवं पर्यावरण से संतुलन बनाकर अच्छा और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है
2. उत्पन्न खाद्यान्न में उचित मात्र में सभी पोषकतत्व उपलब्ध होते हैं स्वस्थ भोजन प्राप्त होता है
3.विषयुक्त भोजन एवं उनसे होने वाले असाध्य बीमारियों एवं रोगों से मुक्ति मिलती है
4. शरीर की प्रतिरोधी क्षमता का विकास होता है हम स्वस्थ और रोगों से मुक्त रहते हैं
5. कम खर्चे में अधिक लाभ कमाया जा सकता है स्वदेशी कृषि ही एक ऐसा स्वावलंबी कार्य है जिसमे 900% लाभ कमाया जा सकता है यदि हम 10 रूपये खर्च करते हैं तो 100 रूपये कमा सकते हैं
6. हमारे पशुधन का संवर्धन होता है
7.रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों में होने वाला खर्चा बच सकता है
8. स्वस्थ सुखी समृद्ध एवं स्वावलंबी भारत का निर्माण संभव है







